ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) वेबसाइट « magharebia »के हवाले से, ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति ने इस पर जोर देते हुऐ कि कुछ अतिवादी विद्वानों द्वारा दूसरों की तक्फ़ीर पर जारी फतवे राष्ट्रीय सामंजस्य और एकता को जोखिम में डाल सकते हैं, देश की विधान परिषद से आग्रह किया कि इस तरह के कार्यों के अपराधियों को सज़ा देने के लिए तत्काल क़ानून निर्धारित करें.
उन्होंने अपने संदेश में कहा: विभिन्न विद्वानों द्वारा विभिन्न विचारों के साथ इस तरह के बयानों से से संबंध राष्ट्रीय एकता के लिए नुकसान और विभाजन तथा नागरिकों के बीच तनाव के सिवा कोई परिणाम नहीं होगा, तक्फ़ीर करने वालों की सजा के लिऐ पेनल्टी लगाने का आदेश वास्तव में ट्यूनीशिया में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व लाने में मददगार होगा.
अपने संदेश के दूसरे भाग में ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति ने दोहराया: कोई भी शख़्स अधिकार नहीं रखता कि अपने हमवतन भाई पर पाषंड का आरोप लगाऐ और उसे बदनाम करे क्योंकि समाज में ऐसे हालात पैदा करने से, हिंसा बढ़ेगी और यह स्थिति किसी के लिए फायदेमंद नहीं है.
उन्होंने कहा, ट्यूनीशिया में कुछ समूह, आज़ादी से तक्फ़ीरी फतवा जारी करने में लगे हैं और बिना कोई स्पष्ट कारण के अन्य मुस्लिम समूहों के विरुद्ध काम कर रहे हैं मुझे आशा है कि संविधान में ऐक कानूनी शिक़ जोड़ी जाऐ ता कि इस तरह की घटना को रोका जा सके.
मुन्सिफ़ अल-मरज़ूक़ी ने इसी तरह कहाः तक्फ़ीर एक गैर-राजनीतिक तरीक़ा दूसरों को हतोत्साहित करने का है और हम इस का उपयोग करने से रोकेंगे.
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