राजनीतिक समूह: आयतुल्लाह इमामी काशानी ने सूरऐ अंबियों की आयत 105 की ओर इशारा करते हुए विचार व्यक्त किया: इस सूरह में है « وَلَقَدْ كَتَبْنَا فِی الزَّبُورِ مِن بَعْدِ الذِّكْرِ أَنَّ الْأَرْضَ یَرِثُهَا عِبَادِیَ الصَّالِحُونَ » यह बशारत और विश्व आंदोलन जरूरी है कि एक जगह से शुरू हो और मेरे विचार में तेहरान में गुटनिर्पेक्ष देशों के आंदोलन का सम्मेलन इस लक्ष्य के वजूद का शुरुआती बिंदु है.