अंतर्राष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) नेटवर्क अल आलम की जानकारी डेटाबेस के हवाले से, इस फिल्म से पता चलता है कुछ युवाओं ने ध्वज "या हुसैन (अ.स)" को अलक़ुसैर की मस्जिद इमाम हसन (अ.स) के ऊपर, जो मस्जिद उमर बिन ख़त्ताब से दो किलोमीटर की दूरी पर है फहराया,जिस का पता चलता है कि पहली खबर जारी करने का उद्देश्य, विभाजन और धार्मिक भावनाओं को भड़काना है.
इस वीडियो के दूसरे भाग में कि जिसे दी.वी नेटवर्क अलमनार ने जारी किया है अलक़ुसैर में मस्जिद इमाम हसन अ.स. और उमर बिन ख़त्ताब के अज़ान स्थल व दोनों मस्जिदों की बनावट में इंजीनियरिंग और मेमारी की दृष्ट से बहुत फ़र्क़ है.
अरबी मीडिया विशेष रूप से कतर के अल जजीरा और सऊदी अरब के अल Arabiya,ने पहली फिल्म को सीरिया में जाति राजद्रोह भड़काने और "अलक़ुसैर की मस्जिदों के शिया साज़ी की कोशिश" के नाम से स्पष्ट झूठ फैलाने के उद्देश्य से प्रकाशित किया था.
सैयद हसन Nasrallah, हिजबुल्लाह के महासचिव ने 14 जून के एक भाषण में, पहली फिल्म को झूठा बताया और इस्लामी दुनिया में सुन्नी और शिया के बीच राजद्रोह फैलाना बताया है.
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