IQNA

15:39 - June 03, 2016
समाचार आईडी: 3470452
काबुल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर:

इमाम ख़ुमैनी (र)के विचार दुन्यावी सरहदों से ऊपर हैं

इंटरनेशनल ग्रुप: "अब्दुल लतीफ़ नज़री" ने कहा, इस्लामी देशों के बीच एकता इमाम ख़ुमैनी की गतिविधियों की प्राथमिकता थी यही कारण है कि इमाम ख़ुमैनी ने ईरान की सीमाओं से परे जगह बना ली है।

अब्दुल लतीफ़ नज़री, काबुल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर जो कि इमाम खुमैनी के निधन की 20वीं वर्षगांठ में भाग लेने के लिए ईरान में आऐ हुऐ हैं अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के साथ एक साक्षात्कार में कहा: इमाम ख़ुमैनी ईरानी भूगोल तक सीमित नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि इमाम ख़ुमैनी एक मुस्लिम उद्भव के रूप में इन हालात में ज़ाहिर हुऐ कि मुस्लिम दुनिया संस्कृतिक गिरावट का शिकार थी।

अब्दुल लतीफ़ नज़री, ने कहा: इमाम ख़ुमैनी (र) के विचारों ने धर्म को मुस्लिम दुनिया में पहली बार राजनीतिक बहस का मुद्दा क़रार दिया और मुस्लिम देशों में इस्लामी जागृति को मजबूत बनाया।

काबुल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने कहा, इस्लामी देशों के बीच एकता इमाम ख़ुमैनी की गतिविधियों की प्राथमिकता थी यही कारण है कि इमाम ख़ुमैनी ने ईरान की सीमाओं से परे जगह बना ली है।

उन्होंने कहा: आज हम देख रहे हैं कि प्रति दिन इस्लामी देशों की युवा पीढ़ी का परिचय इमाम (र)के विचारों के साथ अधिक से अधिक होरहा है क्योंकि इस्लामी दुनिया की समस्याओं को दूर करने के लिए समाधान इमाम (र) के स्पष्ट और शुद्ध विचारों में पाया जा सकता।

नज़री, ने कहा: इमाम ख़ुमैनी () का राजनीतिक पैटर्न एक ऐसा पैटर्न है कि जिसके ज़रये पश्चिमी उदार लोकतंत्र के जाल या अन्य राजनीतिक सिस्टम से दूर रह कर एक मध्य रेखा को चुना जा सकता है जिस में इस्लाम और लोगों दोनों की भूमिका रह सकती है।

अंत में, उन्होंने कहा: कि इमाम ख़ुमैनी (र) के राजनीतिक प्रवचन इस्लामी देशों के लिऐ इस समय सबसे अधिक वांछनीय बहस के रूप एक उदाहरण और एक मॉडल के तौर पर पेश हो सकती है।

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