अंतरराष्ट्रीय समूह: भारत में मुसलमानों के नरसंहार के 14 साल बाद, हमले के षड्यंत्रकारियों के खिलाफ देश में एक अदालत ने परिणामस्वरूप एक अनुचित फैसला जारी किया ।

भारत में मुसलमानों के नरसंहार के अपराधियों के लिए ग़ैर आदिलाना आदेश
अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) प्रेस टीवी द्वारा उद्धृत, भारत में मुसलमानों के नरसंहार के 14 साल बाद, परिणामस्वरूप एक अदालत ने इस देश में हमले की साजिश रचने वालों के खिलाफ फैसला सुनाया। 2002 में भारतीय मुसलमानों के नरसंहार के पीड़ितों की परिवार, वालों ने अपराधियों के खिलाफ फैसले को "अनुचित" बताया।
इस अदालत ने गुजरात राज्य में 2002 में 69 मुसलमानों के नरसंहार के अपराधियों के मुकदमे में 11 लोगों, को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
यह नरसंहार उस समय हुआ जब नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री, गुजरात राज्य के मुखमंत्री थे।
ज़किया जाफ़री, जिसका पति भारतीय कांग्रेस के प्रतिनिधियों मे से थे और मुसलमानों के घरों को जलाने के दौरान मारे गए थे, ने कहा कि यह हुक्म बहुत "कोमल और अनुचित" है।
उन्होंने कहा: मैं " इस आदेश से सहमति नहीं हूं ...यह (आदेश) गलत है।"
इस अदालत ने इसी तरह भी इस नरसंहार के दोषी क़रार दिऐ लोगों में से 12 अन्य लोगों को 7 साल जेल और प्रतिवादियों में से ऐक अन्य को जेल में 10 साल की सजा सुनाई है।
2002 में अतिवादी हिंदुओं ने अहमदा गुजरात के सबसे बड़े शहर पर हमले के बाद मुसलमानों को मारने पीटने और घायल करने के बाद उनके घरों को जला दिया था सबसे भीषण हमले में, हिंदूओं ने एक आवासीय परिसर में आग लगा थी जिसमें 69 मुसल्मानों को, कई महिलाओं और बच्चों सहित जला दिया गया था।
इस आवासीय परिसर को उस समय जला दिया गया जब कि हिंदुओं द्वारा हमलों के डर से कई परिवारों ने उस में शरण ले रखी थी।
यह फैसला उस समय जारी किया गया है कि अभियोजक पक्ष ने अपराधियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी।
पीबी देसाई, इस केस न्यायाधीश, ने मुसलमानों के नरसंहार को "गुजरात में नागरिक समाज के अंधेरे दिनों में से एक दिन है," बताया और सरकार से आग्रह किया कि जारी आदेश को कम न किया जाऐ।