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कुरान क्या कहता है / 11

अपने दुश्मन को निरस्त्र करदो!

15:26 - June 20, 2022
समाचार आईडी: 3477466
तेहरान(IQNA)यह कैसे कल्पना की जा सकती है कि ईश्वर, जिसे हम उसकी दया से जानते हैं, ने मनुष्य को अकेला छोड़ दे ता कि वह अपने शत्रु का क़ैदी हो जाऐ?!

प्रलोभन और धोखा वह मार्ग है जिसका उपयोग शैतान मनुष्य को धोखा देने के लिए करता है। परमेश्वर के अनुसार, मनुष्य की सृष्टि के आरम्भ से ही शैतान की शत्रुता प्रकट हो गई थी: «… لَا تَعْبُدُوا الشَّيْطَانَ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُبِينٌ؛” शैतान की इबादत मत करो क्योंकि वह तुम्हारा स्पष्ट शत्रु है (बक़रा, 208)।
पवित्र कुरान, शैतान और उसके प्रभाव के तरीकों का परिचय देने के बाद, इस ख़तरे से छुटकारा पाने के तरीके बताता है:
शैतान का सामना करने के साथ-साथ आत्मा को उसके द्वारा बनाए गए प्रदूषण से शुद्ध करने का पहला कदम पश्चाताप है। मनुष्य की पहली लग़्ज़िश को पश्चाताप द्वारा माफ़ कर दिया गया था: «فَتَلَقَّى آدَمُ مِنْ رَبِّهِ كَلِمَاتٍ فَتَابَ عَلَيْهِ إِنَّهُ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ: आदम को अपने रब से कलमात मिले, और [परमेश्वर] ने उसे क्षमा कर दिया, क्योंकि वह दया करने वाला, दयावान है" (बक़रा 37)।
पश्चाताप का महत्व इतना है कि यदि कोई इसमें सफल हो जाता है और उसके बाद अच्छे कर्म करता है, तो उसके लिए न केवल पाप नहीं लिखा जाता है, बल्कि भगवान उसके बुरे कर्मों को अच्छे कर्मों में बदल देता है। «إِلَّا مَنْ تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ عَمَلًا صَالِحًا فَأُولَئِكَ يُبَدِّلُ اللَّهُ سَيِّئَاتِهِمْ حَسَنَاتٍ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَحِيمًا"सिवाय उसके जो तौबा करे और ईमान लाए और नेक काम करे, तो अल्लाह उनके बुरे कामों को भले कामों में बदल देता है, और अल्लाह हमेशा माफ़ करने वाला, रहम करने वाला है। ( (70فرقان
अपने पूरे वजूद के साथ ईश्वर पर ध्यान देना मानव आत्मा की आवश्यकता है और उन ग़फ़लतों, जो कि शैतान की प्रवृत्ति में से एक है, निष्प्रभावी होने का कारण बनता है «يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا اللَّهَ ذِكْرًا كَثِيرًا: हे ईमान वालों, ईश्वर को बहुत याद करो (अल-अहज़ाब, 41)।
शैतान की बुराई से ईश्वर की शरण लेना और धर्मपरायणता रखना और पाप की स्थितियों से खुद को दूर रखना और ईश्वर पर भरोसा करने से मनुष्य की इच्छा शैतान पर विजय प्राप्त कर लेती है और मनुष्य अपनी पूर्णता के मार्ग से विचलित नहीं होता: «إِنَّهُ لَيْسَ لَهُ سُلْطَانٌ عَلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَعَلَى رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ:َ: उन पर उसका कोई प्रभुत्व नहीं है जो ईमान लाते हैं और अपने रब पर भरोसा रखते हैं (नहल, 99)।
 
कीवर्ड: कुरान क्या कहता है, शैतान, दुश्मनी, प्रलोभन, मार्गदर्शन

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